नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित किया गया नया कानून दिल्ली की चुनी हुई सरकार को लगभग शक्तिहीन करता है और सभी अधिकार उपराज्यपाल को देता है जिनके पास अब करीब 80 विभागों का नियंत्रण होगा और वह विधानसभा द्वारा पारित विधेयक को भी रोक सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अधिनियम 2021 को मंगलवार रात को अधिसूचित करने के बाद से उपराज्यपाल के हाथ में राष्ट्रीय राजधानी का सारा प्रशासन आ गया है। गृह मंत्रालय ने एक आदेश में कहा कि इस कानून को संसद ने पिछले महीने पारित किया था जो 27 अप्रैल से प्रभावी हो गया है।
नए कानून के तहत, ‘सरकार’ का मतलब एलजी है। दिल्ली सरकार को उन विषयों पर कोई भी काम करने से पहले एलजी से इजाजत लेनी होगी जो अबतक उसके मातहत आते थे। इनमें भ्रष्टाचार निरोधक, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, पर्यटन, केंद्रीय जेल, आबकारी, कुछ कॉलेज, अस्पताल व परिवहन शामिल हैं।
अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल शहर की सरकार से मशविरा किए बिना सीधे अधिकारियों को निर्देश दे सकते हैं जबकि चुने हुए प्रतिनिधियों को अपना कोई भी आदेश और तबादले लागू कराने के लिए एलजी की मंजूरी की जरूरत होगी। दिल्ली विधान सभा के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश है जैसे जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी है लेकिन राष्ट्रीय राजधानी के पास उनकी जैसी शक्तियां नहीं हैं।
लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि केंद्र सरकार के पास है जबकि अन्य क्षेत्र दिल्ली सरकार के तहत आते हैं। बहरहाल, नया कानून बनने के बाद दिल्ली सरकार को कोई भी बदलाव करने के लिए एलजी की मंजूरी लेनी होगी। नया कानून लाने की वजह बताते हुए एक अधिकारी ने कहा, यह स्पष्ट करना जरूरी हो गया था कि दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है और उसकी शक्तियां सीमित हैं। यह पूर्ण राज्य नहीं है और दिल्ली में सरकार चलाने वालों को यह तथ्य समझना चाहिए।
दिल्ली विधान सभा राज्य सूची और समवर्ती सूची में शामिल सभी विषयों पर कानून बना सकती है लेकिन वे उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना अमल में नहीं आएंगे। नया कानून कहता है, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) कानून 2021 के लागू होने से पहले इसके प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला कोई भी नियम रद्द माना जाएगा।
जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में भूमि स्थानीय सरकार के पास है जबकि लोक व्यवस्था और पुलिस केंद्र सरकार के पास है। चंडीगढ़, लद्दाख, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादर और नागर हवेली और दमन और दीव जैसे अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभाएं नहीं हैं और ये सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में आते हैं।
केंद्र सरकार कहती रही है कि यह विधेयक एलजी और दिल्ली सरकार की शक्तियों के क्षेत्र पर उच्चतम न्यायालय के जुलाई 2018 के फैसले के अनुरूप है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने संसद में कहा था कि दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है और उसके पास पूर्ण शक्तियां भी नहीं हैं।
