तेलंगाना में जल संकट पर KTR का कांग्रेस सरकार पर हमला, बोले- ‘कांग्रेस ने पैदा किया सूखा’

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दक्षिण भारत Updated On :

हैदराबाद: तेलंगाना में जल संकट को लेकर भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य में पैदा हुए सूखे जैसे हालात के लिए मौसमी परिस्थितियों के बजाय सरकार की प्रशासनिक विफलता को जिम्मेदार ठहराया। KTR ने आरोप लगाया कि सिंचाई परियोजनाओं और पंप हाउसों का उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण नदियों का हजारों टीएमसी पानी व्यर्थ बह गया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में KTR ने इसे ‘कांग्रेस द्वारा पैदा किया गया सूखा’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि 1 जून 2026 से अब तक गोदावरी का 750 टीएमसी से अधिक और कृष्णा नदी का लगभग 250 टीएमसी पानी राज्य सरकार की लापरवाही के कारण नीचे की ओर बह गया।

सिंचाई परियोजनाओं के इस्तेमाल में लापरवाही का आरोप

KTR ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों, जलाशयों और अन्य जल भंडारण संरचनाओं को भरने के लिए महत्वपूर्ण लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं का समुचित इस्तेमाल नहीं किया।

उन्होंने कन्नेपल्ली और देवदुला पंपों का उपयोग नहीं किए जाने पर सवाल उठाए। साथ ही, पालमुरु-रंगारेड्डी और KLI पंपों को नहीं चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे कृष्णा नदी का पानी भी बर्बाद हुआ।

BRS नेता के मुताबिक, सरकार ने जल संकट से निपटने के लिए समय रहते प्रभावी रणनीति नहीं बनाई, जबकि मौसम संबंधी विशेषज्ञों ने मार्च से ही अल नीनो की आशंका को लेकर चेतावनी दी थी।

आंध्र प्रदेश पर पानी का रुख मोड़ने का आरोप

KTR ने आरोप लगाया कि तेलंगाना से पानी नीचे की ओर छोड़े जाने के बाद पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश ने गोदावरी और कृष्णा नदियों के पानी को अपने क्षेत्रों की ओर मोड़ लिया।

उन्होंने दावा किया कि आंध्र प्रदेश ने गोदावरी के पानी के लिए पुट्टिसीमा और कृष्णा के पानी के लिए पोथिरेड्डीपाडु तथा वेलिगोंडा सुरंग का इस्तेमाल किया। KTR ने यह भी आरोप लगाया कि पानी को कुप्पम क्षेत्र की ओर मोड़ा गया।

हालांकि, ये आरोप BRS नेता की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को दिए निर्देश

दूसरी ओर, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 11 अक्टूबर को राज्य में अल नीनो के संभावित प्रभाव और जल संकट के हालात की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी। यह बैठक हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित उनके आवास पर हुई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खड़ी फसलों का आकलन करने और फसल की कटाई पूरी होने तक किसानों को पानी की कमी से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने भविष्य में जल संकट को गंभीर होने से रोकने और पानी की एक-एक बूंद का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

रेवंत रेड्डी ने कहा कि अल नीनो के प्रभाव और राज्य में बारिश की कमी के मुद्दे पर मंत्रियों के साथ विशेष बैठक की जाएगी। कम बारिश वाले क्षेत्रों की स्थिति, किसानों की परेशानियों और तत्काल राहत उपायों पर विचार करने के बाद महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

215 मंडलों में सूखे जैसे हालात, केंद्र से 20 हजार करोड़ रुपये की मांग

राज्य में करीब 215 मंडलों में सूखे जैसी स्थिति के बीच तेलंगाना सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र से इन क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर चुकी है। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता और 20,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को रोजगार गारंटी योजना के तहत निर्धारित 125 दिनों के अतिरिक्त 50 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र से अपील करने का भी निर्देश दिया। राज्य सरकार ने अतिरिक्त रोजगार दिवस उपलब्ध कराने में सहयोग की तैयारी जताई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सर्वदलीय समिति के गठन पर मंत्रियों से चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।

तेलंगाना में जल संकट के बीच अब सिंचाई परियोजनाओं के प्रबंधन, किसानों को राहत और केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां BRS ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, वहीं राज्य सरकार संकट से निपटने के लिए अधिकारियों के साथ समीक्षा और राहत उपायों पर काम कर रही है।



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