AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने सपा चीफ अखिलेश यादव को उनके बयान के बाद घेर लिया है। AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने कहा, “सपा प्रमुख अखिलेश यादव कहते हैं की मर्यादा का पहला नाम श्री राम और दूसरा संविधान है। इसका मतलब साफ है कि वह समाजवाद को त्यागकर बीजेपी के साथ मिलकर सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते को अपना चुके हैं। उनको किसी विषय की चिंता नहीं है। कैसे भारत में एक आस्था सुप्रीम हो सकती है। यही तो भारत में अब सीएम योगी और अखिलेश यादव की भाषा में कोई फर्क नहीं है। यह दोनों एक आस्था को सुप्रीम मानते हैं जो भारत के संविधान के अनुसार गलत है।
उन्होंने आगे कहा, “अखिलेश यादव का बयान मुसलमान की आंख खोलने वाला है कि उनको मुसलमान के मुद्दों की कोई चिंता नहीं है। उनको सिर्फ एक धर्म की आस्था की चिंता है।” उन्होंने आगे कहा कि आपके लिए आस्था सुप्रीम हो सकती है लेकिन मेरे लिए नहीं है। भारत की कोई धार्मिक पुस्तक, ग्रंथ और धर्म है तो वह संविधान है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, “उन्हें यह गलतफहमी है कि उत्तर प्रदेश का मुसलमान उनका सियासी गुलाम है। बंधुवा मजदूर है और वोट डालने वाला रोबोट मशीन है। हम उनका डराकर, गुमराह कर वोट ले लेंगे, लेकिन अब यह नहीं होने वाला है।”
उन्होंने आगे यह भी कहा, “अब मुसलमान दरी नहीं बिछाएगा बल्कि अधिकार, हिस्सेदारी की बात करेगा। अब दावेदारी नहीं हिस्सेदारी की बात होगी।”
शादाब चौहान ने आगे कहा, “अखिलेश यादव का समाजवाद का मुखौटा आज बेनकाब हो गया। बुंदेलखंड में बताइए कितने विधायक हैं। सिर्फ रुहेलखंड और मुसलमानों की आबादी के बलबूते सत्ता में आने और वहां के विधायक बनाने वाले अखिलेश यादव हमारी बात तक नहीं करते।”
उन्होंने आगे कहा, “मस्जिद, मदरसा, खानकाहों को टारगेट करना हो या फिर कितनी जगह मुसलमानों पर अत्याचार, आंदोलन हुआ कितनी जगह पर बात की। सुबह शाम राम मंदिर करते हैं।”
सीएम योगी और अखिलेश यादव दोनों की भाषा हिंदुत्व की भाषा है। जिसमें भारत के संविधान को सेंकेडरी बताया गया है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान के अनुसार देश को चलाने का कार्य होना चाहिए वहां यह लोग आस्था को सुप्रीम कर रहे हैं।
