एसआरएन अस्पताल का नाम अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना

प्रयागराज। काकोरी केस के महानायक अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल को राष्ट्रीय गौरव दिलाने और स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) का नाम उनके नाम पर किए जाने की मांग को लेकर महुआ डाबर संग्रहालय के नेतृत्व में एसआरएन अस्पताल परिसर में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को चौथे दिन भी जारी रहा।

धरना स्थल पर दिनभर बड़ी संख्या में छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक पहुंचे तथा आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इस दौरान लोगों ने अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की और अस्पताल का नाम उनके नाम पर किए जाने की मांग के समर्थन में नारे लगाए।

धरने में वक्ताओं ने कहा कि देश आजादी का अमृत काल मना रहा है और वर्ष 2026 ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी का वर्ष है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर काकोरी केस के महानायक ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल और उनकी विरासत को राष्ट्रीय सम्मान मिलना चाहिए।

धरने को संबोधित करते हुए महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक एवं क्रांतिकारी-शहीद वंशज डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए महान क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह का बलिदान प्रयागराज की मलाका जेल में हुआ था। उस दौर में मलाका जेल को संयुक्त प्रांत की कुख्यात जेलों में गिना जाता था। उन्होंने कहा कि आज उसी ऐतिहासिक बलिदान स्थल पर स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय स्थापित है, लेकिन इस स्थान से जुड़ी क्रांतिकारी विरासत की पहचान धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है।

डॉ. राना ने कहा कि महुआ डाबर संग्रहालय की स्पष्ट मांग है कि एसआरएन अस्पताल का नाम तत्काल अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर किया जाए। उन्होंने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी के वर्ष में भी यदि क्रांतिकारियों के सम्मान और उनकी स्मृतियों के संरक्षण को लेकर सरकारें गंभीर कदम नहीं उठाती हैं तो स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों के प्रति की जाने वाली श्रद्धांजलि महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष कर देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया, आज उनकी स्मृतियों और विरासत को सम्मान दिलाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता दुबे ने कहा कि अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के पवित्र बलिदान स्थल का संरक्षण और उसकी ऐतिहासिक पहचान को कायम रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि महान क्रांतिकारी की विरासत और धरोहर को संरक्षित करने का यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक उन्हें उनके योगदान के अनुरूप गौरवशाली सम्मान नहीं मिल जाता।

महुआ डाबर संग्रहालय के प्रतिनिधि डॉ. अवनीश सिंह ने आम नागरिकों से अपील की कि 9 अगस्त काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस के अवसर पर मलाका जेल पहुंचकर काकोरी केस के क्रांतिवीर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह को श्रद्धासुमन अर्पित करें। उन्होंने कहा कि यह वह ऐतिहासिक तारीख है, जिसने ब्रिटिश शासन की नींव को हिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे ठाकुर रोशन सिंह के सम्मान और उनके बलिदान स्थल की पहचान कायम करने की इस मांग को अपना समर्थन दें।

धरने में प्रमुख रूप से राजन तिवारी, हिमांशु सिंह, विक्की यादव, सात्विक सिंह, अमित गिरी, चंदन पासी, आइश पटेल, सम्राट राय, अनुराग सिंह, अमन तिवारी और प्रत्यूष सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

First Published on: August 9, 2026 10:24 AM
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