लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए जाने से सियासी माहौल गरमा गया है। नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर लगाए गए इन होर्डिंग्स में अखिलेश यादव के साथ माफिया से नेता बने दिवंगत अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं। पोस्टर में जेल में बंद सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान की तस्वीर भी शामिल है। पोस्टर पर लिखे नारे को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
पोस्टर पर क्या लिखा है?
लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे पर लगाए गए पोस्टर पर लिखा है, “सपाइयों का क्या भरोसा-चाय, समोसा, रस मलाई, सारे माफिया अपने भाई।” इस नारे के जरिए पोस्टर में सपा और उसके नेतृत्व पर निशाना साधा गया है।
यह पोस्टर ऐसे समय सामने आया है, जब अखिलेश यादव हाल ही में रामपुर जिला जेल में बंद सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात करने पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद भाजपा और उसके सहयोगियों ने सपा पर राजनीतिक अवसरवाद और आपराधिक तत्वों को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, पोस्टर किसने लगवाया, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।
2027 में सरकार बनाने का अखिलेश यादव ने किया दावा
इस बीच, अखिलेश यादव ने 22 अक्टूबर को दावा किया कि समाजवादी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने के लिए एकजुट है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि आगामी चुनाव में भाजपा उत्तर प्रदेश से साफ हो जाएगी।
आजम खान के साथ अपने संबंधों पर उन्होंने कहा कि आजम साहब पहले भी सपा के साथ थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। अखिलेश यादव के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की एकजुटता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
जातिगत जनगणना और आबादी के अनुपात में आरक्षण की मांग
अखिलेश यादव ने जातिगत जनगणना की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि पिछड़े वर्गों, दलितों और वंचित समुदायों को उनकी आबादी के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए।
उन्होंने बिंद, निषाद और कश्यप समेत विभिन्न पिछड़े और वंचित समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वर्गों की आबादी के अनुसार आरक्षण की मांग का वह समर्थन करते हैं।
महिला आरक्षण पर भाजपा को घेरा
महिला आरक्षण के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने भाजपा पर इसके क्रियान्वयन में देरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो इसे लागू करने की दिशा में कदम उठा सकती है।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने स्तर पर 33 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारने का निर्देश दिया है। उन्होंने इसे सपा के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की विचारधारा से जुड़ा कदम बताया।
ओवैसी के चुनाव लड़ने पर क्या बोले अखिलेश?
रामपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे और चुनाव लड़ने की संभावना पर अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी चुनाव लड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा को सत्ता से हटाना चाहती है।
आजम खान के परिवार पर झूठे मुकदमों का आरोप
रामपुर जिला जेल में आजम खान से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर आजम खान और उनके परिवार को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि परिवार के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
अखिलेश यादव ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया और शिक्षा से जुड़े इस संस्थान के खिलाफ साजिश की गई। ये आरोप अखिलेश यादव ने लगाए हैं; इस संबंध में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
आजम खान रामपुर सदर से 10 बार विधायक रह चुके हैं और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। वह सपा के प्रमुख मुस्लिम नेताओं में गिने जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जालसाजी के एक मामले में दोषसिद्धि के बाद वह पिछले साल नवंबर से रामपुर जिला जेल में बंद हैं।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पोस्टर विवाद, आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात और आरक्षण जैसे मुद्दों ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
