प्रधानमंत्री और उनके विचारधारात्मक सहयोगी हमें बता रहे हैं कि भारत पिछले एक हज़ार सालों से गुलाम था। मतलब यह कि जिस समय भारत पर मुसलमान राजाओं का शासन था, उस समय देश…
आजादी की लड़ाई के दौरान के भारत के मूल्य भगत सिंह, अम्बेडकर और गांधी के विचारों के रूप में प्रकट हुए जिन्होंने आजादी, समानता और बंधुत्व या मेल-जोल पर जोर दिया। राष्ट्रपिता से…
मुड़कर देखा जाना चाहिए कि राम लला के लिए हज़ारों करोड़ की लागत से बने भव्य मंदिर के परिसर में बैरिकेड्स के पीछे शांत भाव से सजे-धजे और मूक बने बैठे वे सात-आठ…
इस लेख में लोहिया पूरे भारतीय इतिहास की व्याख्या नहीं करते। उसके लिए उनकी इतिहास चक्र की अवधारणा को देखना होगा। लेकिन आधुनिक काल की व्याख्या करते हुए लोहिया याद दिलाते हैं कि…
बालवीर गणतंत्र दिवस परेड से दस दिन पहले राजधानी में आकर परेड की रिहर्सल में शामिल होते हैं। इसके अलावा, यह दोपहर और शाम को कभी राष्ट्रपति कभी, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, कभी दिल्ली के…
संदेह होता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम की प्रतिमा के प्राण प्रतिष्ठा समारोह को योजनाबद्ध तरीक़े से एक राष्ट्रीय उत्सव में इसीलिए तो नहीं तब्दील किया जा रहा है कि राहुल गांधी की…
कुदरत अपना खजाना सब पर लुटाती है। मनुष्यता की सभी खूबियां सभी को बांटती है। कोई भी ताला उन्हें बंद नहीं कर सकता। सुनते आए हैं राम कुदरत में रमे हुए हैं –…
लगभग एक साल पहले निकाली गई भारत जोड़ो यात्रा ने भी देश के लोगों के दुखों और परेशानियों को सामने लाने का काम किया। इस यात्रा से यह संदेश भी गया कि विभिन्न…
कानूनी मर्यादा से बड़ा सवाल संवैधानिक मर्यादा का है। क्या हमारे देश का प्रधानमंत्री (या संवैधानिक पद पर आसीन कोई भी व्यक्ति) बतौर प्रधानमंत्री किसी धार्मिक अनुष्ठान का जजमान बन सकता है?
क्या इससे हिंदू किसानों की समस्याएं सुलझेंगी? क्या इससे हिंदू बेरोजगारों को काम मिलेगा? क्या इससे हिंदू महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य या पोषण का स्तर बेहतर होगा? क्या इससे दलितों पर होने…
विरासत स्थलों के लेकर जबरन विवाद खड़ा करना और उन्हें ऐसे हिन्दू स्थान बताना जिन पर मुसलमानों ने कब्ज़ा कर लिया है और जिन्हें मुसलमानों से छीना जाना चाहिए, सांप्रदायिक ताकतों की पुरानी…
तुलसी ने रामचरित के माध्यम से जीवन के कुछ ऐसे व्यावहारिक आदर्शों की प्रतिष्ठा भी की जिनके चलते जनमानस में उनके राम को इस कदर लोकप्रियता हासिल हुई है। डॉ. लोहिया ने यह माना…
पिछले 63 साल में भारत का सफर हमें इंसाफ की डगर से बहुत दूर ले आया है। हम हर सवाल को अपने-पराए की नजर से देखते हैं अगर शिकार मेरे अपने धर्म या जाति का…
केरल में कई धनी ईसाई इस हिन्दू बहुसंख्यकवादी राजनीति के जाल में फँस रहे हैं। यह भी सच है कि ईडी, इनकम टैक्स आदि के कहर से बचने के लिए ईसाई समुदाय के…
लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा का मुकाबला करने के लिए विपक्ष ने ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूजिव अलाएंस) नाम से गठबंधन बनाया है। कांग्रेस से अलग मोर्चा बनाने कि संभावना अब नहीं लगती।…
प्रधानमंत्री के क्षेत्र में किस प्रकार का आतंक फैला हुआ है इसकी कल्पना प्रधानमंत्री को इन दो घटनाओं से करना चाहिए। मैं चाहूंगा कि वह आगामी मन की बात में इस बारे में…
महात्मा गांधी का शहादत दिवस 30 जनवरी इस महीने के सभी सूत्रों को हमारे गणतंत्र से जोड़ता है। राम के भक्त की हिंदू उग्रवादी द्वारा हत्या राम के नाम पर चल रही समकालीन…
सन 1992 के छह दिसंबर को चुने हुए कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को ज़मींदोज़ कर दिया। उन्हें बाकायदा इसका प्रशिक्षण दिया गया था और उन्होंने इसकी रिहर्सल भी की थी। जिस समय मस्जिद…
यह अखबार चार पन्नों का छपता था। हरेक पन्ने में दो कॉलम और 32 लाइनें रहती थीं। इसमें ही मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर सार्वजनिक सूचनाएं छपवाते थे। ये लगभग 21 सालों तक…
सांसदों के निलंबन की कार्रवाई बताती है कि सत्तारूढ़ दल को न सिर्फ़ जनता की ओर से न्यायोचित माँगें उठाने वाले सदस्यों की ज़रूरत नहीं बची, उसका एजेंडा उस जनता के बिना भी…
भारतीय अपने खानपान तथा वेशभूषा के स्तर पर भी सदा भारतीय ही बने रहते हैं। दिवाली और होली, रक्षा बंधन, छठ, करवा चौथ, नवरात्र, शादी समारोह आदि अवसरों पर भारतीय महिलाएं आमतौर पर…
संसद में जो हुआ वह स्पष्टतः कुंठित विद्यार्थियों और युवाओं द्वारा अपनी पीड़ा को अभिव्यक्त करने का प्रयास था। इसमें कोई संदेह नहीं कि जो तरीका इन युवाओं ने अपनाया वह सही नहीं…
लोकतंत्र में सार्वजनिक विमर्श का सुर व स्तर सत्तापक्ष निर्धारित करता है, विपक्ष उसका अनुशरण करता है। संसद जिस स्तर तक गिरती है, देश का सार्वजनिक विमर्श भी उतना ही गिरता है।
मुझे कुछ समय पहले मेरे ईस्ट अफ्रीकी देश केन्या के मित्र स्टीफन मुंगा कह रहे थे कि वे अपनी आगामी भारत यात्रा के समय काशी जरूर जाना चाहेंगे। मैंने उनकी काशी के प्रति…
सुरेंद्र मोहन के साथ मेरा नजदीकी संबंध मुलताई पुलिस फायरिंग की 12 जनवरी 1998 की घटना के बाद हुआ। हालांकि उसके पहले हम एक ही स्थान वीपी हाउस में रहते थे। हर दिन…