मेरी राजनीतिक दीक्षा गांधीवादी समाजवादी धारा में हुई, लेकिन आदर्श की राजनीति केवल इस धारा तक सीमित नहीं रही। आजादी से पहले की कांग्रेस और बाद में सोशलिस्ट, कम्युनिस्ट और जनसंघ में भी बेशुमार नेता…
आखिर अनुच्छेद 370 में क्या खास बात थी जिसकी मांग कांग्रेस तथा कश्मीरी नेता करते रहे हैं? क्या यह सच नहीं है कि अनुच्छेद 370 राज्य को भारत से जोड़ने में विफल रहा…
कांग्रेस की पराजय पर हो रही आलोचना में दो तरह की अटकलें तलाशी जा सकतीं हैं : पहली यह कि तीन दिसंबर के नतीजों के बाद से मोदी ज़्यादा ताकतवर हो गए हैं।…
गांधी-विशेषज्ञों को यह स्पष्ट करना है कि क्या गांधी ने फिलिस्तीन–इजराइल मामले में अरबों की हिंसा पर चुप्पी साधते हुए केवल यहूदियों को अहिंसा का उपदेश दिया है? क्या वे मुस्लिम-यहूदी विवाद में “महात्मा” के आसन…
भारत में अदालती मामलों में फैसला आने में देरी की वजह सभी स्तरों के न्यायालयों द्वारा पीड़ित व्यक्ति या संगठन को न्याय प्रदान करने में होने वाली है। आप जानते हैं कि देश…
हैट्रिक वाले मिथक की जांच के लिए इतिहास की समीक्षा जरूरी है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव के कुछ ही महीनों में लोकसभा का चुनाव पिछले 2 दशक से चला आ रहा है। पिछली…
संघ की पूरी ताक़त के साथ-साथ पड़ौसी प्रदेशों से बुलाकर तैनात की गई कार्यकर्ताओं की फ़ौज चुनाव में झोंक दी गई। नौकरशाही को पार्टी के साथ ‘सहयोग’ नहीं करने के परिणाम के बारे…
विधानसभा चुनावों में भाजपा के धुआँधार प्रचार के दौरान देश की जनता ने प्रधानमंत्री के भाषणों में कांग्रेस के प्रति जिस तरह के क्रोध और वैचारिक हिंसा से भरे शब्दों से साक्षात्कार किया…
डॉ. बद्रीनाथ ने 1978 में मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की, जिसकी शंकर नेत्रालय अस्पताल इकाई, एक पंजीकृत सोसायटी और एक धर्मार्थ गैर-लाभकारी नेत्र रोग संगठन है।
आज पूरी दुनिया ऐसी जगह खड़ी हुई है जिसके सामने कोई विकल्प नहीं है। अभी मालूम नहीं कि जाएं किधर? एक लंबे समय से मंदी में फंसी हुई दुनिया जिसका विकल्प न तो…
यह अलग बात है कि राष्ट्रपति शासन लगने के कारण 6 महीने तक ही वो मुख्यमन्त्री रह सकीं। लेकिन उनकी नियुक्ति ने एक मुस्लिम महिला नेता में इंदिरा गाँधी के अटूट विश्वास को…
वर्तमान में पाकिस्तान के भारत और बांग्लादेश दोनों से ही संबंध बेहद ही तनावपूर्ण चल रहे हैं। कमोबेश सांकेतिक राजनयिक संबंधों के अलावा भारत और बांग्लदेश ने पाकिस्तान से दूरियां बनाई हुई हैं।…
सवाल यह है कि आलाकमान (मोदी-शाह) अगर शिवराज का कोई ‘चुनाव जिताऊ विकल्प’ नौ सालों में नहीं खड़ा कर पाया है तो लोकसभा चुनावों के पहले चार महीनों में ऐसा क्या चमत्कार हो…
नोएडा एयरपोर्ट का तुरंत बनना इसलिए भी जरूरी है ताकि इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (आईजीआई) को यात्रियों की भीड़ से बचाया जा सके। इधर भीड़ के चलते बदइंतजामी और अराजकता के हालात बने…
एक औसत ड्राइवर दिन में 14-15 घंटे ड्यूटी करता है। उसे सोने का सही से मौका नहीं मिलता। उसकी कायदे से नींद पूरी ही नहीं हो पाती। चूंकि उसे अपने बीवी- बच्चों का…
पीएम ने छत्तीसगढ़ की एक चुनावी सभा में योजना को पाँच और सालों के लिए बढ़ाने की घोषणा नवम्बर के पहले सप्ताह में ही कर दी। पीएम की घोषणा पर लाभार्थियों ने इसलिए…
दुनिया के अपेक्षाकृत तटस्थ और शांतिप्रिय माने जाने वाले देशों का भी बच्चों की लगातार जारी हत्याओं पर निर्णायक स्टेंड नहीं है। गांधी का देश संयुक्त राष्ट्र में यह नहीं कह पाया कि हमास को निपटाने से पहले…
आंबेडकर का धुर विरोधी होते हुए भी संघ परिवार केवल नाम के लिए उनका गुणगान करता है। और अब तो वे उन्हें उदृत भी करने लगा है। यह सब केवल वोट हासिल करने…
सरकार को मिलावट खोरों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए। उनकी लापरवाही से अच्छा भला सेहतमंद व्यक्ति मिलावटखोरों की चंगुल में फंसकर स्थायी रूप से बीमार होता जा रहा है। उन…
भाजपा में ही एक तबके का सोच है कि एंटी-इंकम्बेंसी शिवराज सरकार के ख़िलाफ़ थी। उन्हें टिकिट नहीं दिया जाता तो भाजपा की भारी बहुमत से जीत सुनिश्चित थी। भाजपा आलाकमान द्वारा इतने…
प्रधानमंत्री को उनके अब तक के कार्यकाल में केवल दो अवसरों पर सबसे ज़्यादा चर्चा में रहते हुए पाया गया है। पहला तो तब जब वे देश के हितों को प्रभावित कर सकने…
दूसरे बेतहाशा उपभोग कर रहें हैं, केवल मेरे अकेले के कटौती करने से क्या होगा की सोच से ऊपर उठना होगा। जब तक इसे जीने का तरीका और सलीका नहीं बनायेंगे तब तक…
इस घटना के बारे में आए अनेक वीडियो और प्रमाण भी देखता रहा हूं, मीडिया और निहित स्वार्थों द्वारा फैलाए प्रोपेगंडा को भी सुनता रहा हूं। कुल मिलाकर देश के सामने अद्र्धसत्य से…
लोकसभा में जो हुआ उससे स्पष्ट है कि राहुल गांधी ने 2024 को लेकर सरकार के तय एजेंडे को बदल दिया है और अपना एजेंडा उस पर थोप दिया है। वह एजेंडा अभी…
एक और बात गौर की जा सकती है, अंग्रेजी नहीं जानने वाले लोग इनकी दुनिया के सदस्य नहीं बन सकते; उन्हें साम्राज्यवादी चाल के इन प्यादों का प्यादा बन कर रहना होता है। जनता की…