गाजीपुर। भारत में संगठित किसान आंदोलन के जनक स्वामी सहजानंद और महान घुम्मक्कड़ राहुल सांकृत्यायन के विचारों को लेकर किसानों-मज़दूरों- महिलाओं और नौजवानों से पदयात्रियों ने संवाद किया। देवा में स्वामी सहजानंद के परिजन अरविन्द राय, ग्राम प्रधान दीपक चौरसिया और ग्रामवासियो ने पदयात्रा का स्वागत किया।
देवा स्थित स्मारक स्थल पर स्वामी सहजानंद को माल्यार्पण करने के बाद पदयात्रा शुरू हुई। वीर अब्दुल हमीद की जलालाबाद स्थित और सरसेना में डॉ. अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए तपती धूप में पदयात्रा हुई। आजमगढ़, बलिया, मऊ और गाज़ीपुर से आए पदयात्रियों का जलालाबाद, सरसेना, छपरा, रायपुर, सरोदा सीरसा, देवखरी भिखमपुर, चिरैयाकोट की जनता ने जोरदार स्वागत किया।
वक्ताआओं ने कहा कि जनता में किसानों के भगवान के रूप में जाने-जाने वाले स्वामी सहजानंद कहते थे कि जो अन्न वस्त्र उपजाएगा, अब वह कानून बनाएगा, यह भारत वर्ष उसी का है, अब शासन वही चलाएगा। श्रमिकों के द्वारा शासन चलाना तो दूर अब नए कृषि-श्रम विरोधी कानूनों के जरिए गुलाम बनाया जा रहा है।
हालत इतनी ख़राब है क़ि देश बेरोजगार युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और भर्ती घोटालों से त्रस्त होकर आत्महत्या कर रहे हैं। जिस किसान को स्वामी सहजानंद भगवान कहते थे और उसका अपमान उन्हें बर्दाश्त नहीं था आज वह किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है। स्वामी का वह भगवान किसान-मजदूर अगर अधिकार की बात करता है तो उसे देश विरोधी कहा जाता है। लाठी-डंडा-जेल दमन आम बात हो गई है।
मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. संदीप पाण्डेय, राजीव यादव, मदन सांकृत्ययान, वीरेंद्र यादव, हीरालाल यादव, सत्यम प्रजापति, राजशेखर, अधिवक्ता विनोद यादव, अवधेश यादव, ओबैस असगर, अरविन्द मूर्ति, बृजेश यादव, हिमांशु मौर्या, नीरज यादव, नन्दलाल यादव, जयप्रकाश सिंह, दीपक यादव, आदित्य यादव, संतराम यादव, शिवप्रकाश यादव, बृकेश, गोविन्द यादव आदि ने पदयात्रा की।
