चीन के स्वामित्व वाली फैक्ट्रियों पर हुए हमले से नाराज म्यांमार की सेना ने लोकतंत्र समर्थकों का दमन शुरू कर दिया है। लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शकारियों पर गोलियां चलायी गई है, जिसमें कम से…
देश की राजनीतिक चादर को यदि निर्मल बनाना है, तो इसके बीज बोने के लिए सबसे ऊर्वर खेत पंचायतें ही हो सकती हैं। पंचायती चुनाव उन सभी के लिए भी एक अवसर है,…
श्यामा प्रसाद मुखर्जी पश्चिम बंगाल में भाजपा की कोई मदद नहीं कर पा रहे है। आखिर क्या मजबूरी है कि भाजपा बंगाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जगह रवींद्र नाथ टैगोर का नाम…
कुछ लोगों का मानना था कि उसकी शक्ति बाहर से मिलने वाले समर्थन में निहित है। खाड़ी देशों से आने वाला भारी-भरकम चंदा और पाकिस्तान से मिलने वाले हथियार तालिबान को कमजोर नहीं…
जो स्त्री माँ बन सकती थी, परिवार को एक सूत्र में बांध सकती थी, वह तो विकसित हुई ही नहीं, उसकी जगह नारी में पुरुष के गुणों की वृद्धि हुई है, क्यों कि…
इमरान खान उस मुल्क के प्रधानमंत्री है, जहां प्रधानमंत्री सेना का मुखौटा होता है। बेशक जनता ने उनसे चुनकर भेजा है। खान को विरासत में वो पाकिस्तान मिला है, जो आतंकवाद के कारण…
भूपेंद्र हुड्डा के ग्रुप-23 में शामिल होने का एक बड़ा कारण नरेंद्र मोदी की ईडी और सीबीआई भी है। हुड्डा के खिलाफ ईडी औऱ सीबीआई इस समय काफी सक्रिय है। उनके खिलाफ ईडी…
सोशल मीडिया पर नये नियम मध्यवर्ती प्लेटफॉर्मों पर नकेल कसने से अधिक अपनी जनता को भयभीत करने, सामाजिक-सांस्कृतिक और राजीनितिक स्तर पर मूलगामी सवाल उठाने वालों को क़ाबू में रखने के लिए हैं।
तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद, भाजपा का आत्मविश्वास और बढ़ा है। हालांकि अहम सवाल यही भी है कि टीएमसी छोड़कर भाजपा में जाने वाले नेता क्या…
ऐसे में यह सवाल उठता है कि किसान, राजनाथ सिंह को संकटमोचक के रूप में क्यों देखते हैं? इस बात को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। अगर उससे परहेज हो तो 30…
भारत सरकार को यह पता होना चाहिए कि अमेरिका में रिफार्म के बाद भी खेती का संकट बढ़ा है। वहां रिफार्म, उदारीकरण, कारपोरेटीकरण के बावजूद एक किसान को औसत सलाना सब्सिडी 60 हजार…
क्या नागरिक स्तर पर ऐसी किसी आपसी बातचीत या अफ़वाह से इनकार किया जा सकता है कि अलग-अलग कारणों के चलते व्यवस्था या सरकार के प्रति नाराज़गी रखने वाले वर्गों और समुदायों का…
भाजपा से बेहतर प्रदर्शन अकाली दल ने शहरी इलाकों में किया है। कहां भाजपा पंजाब के ग्रामीण इलाकों में घुसपैठ करने का दावा कर रही थी। लेकिन अब शहरों से भी पांव उखड़…
मोदी और बाइडेन के बीच हुई बातचीत को भारतीय मीडिया ने उत्साह से नहीं दिखाया। निश्चित तौर पर भारतीय मीडिया को यह लगा है कि मोदी और बाइडेन के बीच वो केमेस्ट्री नहीं…
पाकिस्तान में मौजूद हिंदू मंदिरों की दुर्दशा भी सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एक रिपोर्ट में सामने आयी है। मंदिरों की दुर्दशा पर पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने एक आयोग का गठन किया…
भारत में क्राइम ब्रांच द्वारा “आई फोर सी” (I4C) का गठन और इतने बड़े पैमाने पर अपने नागरिकों को जासूस में बदलने की क़वायद इन सबसे बहुत अधिक व्यापक और घातक प्रभाव वाली…
कैलाश सत्यार्थी कोविड काल को व्यापक दृष्टिकोण से देखते हैं। उन्होंने सारे विषयों को करुणा केंद्रित कर दिया है। करुणा हमारे समय का मर्म है। कैलाश जी किताब के जरिए जिन सवालों को…
प्रधानमंत्री स्वामित्व पहल योजना 24 अप्रैल,2020 को शुरु हुई। इस योजना से गांव की आबादी की ज़मीन की सरकारी रिकॉर्ड में दर्जगी हो जाएगी। इसके लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। जैसे खेती…
रोटेरियन सेवा करते रहते हैं, क्योंकि हम जीवन को परिवर्तित करना चाहते हैं। नेपाल में एक परियोजना कई हजार लोगों की जिंदगी बदल देती है। अफ्रीका में पारिवारिक स्वास्थ्य कार्यक्रम ने लाखों लोगों…
अगर सुना होता तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या का षड़यंत्र सफल नहीं होता। विडंबना देखिए कि अदालत, जांच आयोग और सीबीआई ने अपने-अपने स्तर पर हत्या के रहस्य को खोलने के आधे-अधूरे…
पं. दीनदयाल उपाध्याय के राजनैतिक चिंतन के केन्द्र में मतदाता नही मनुष्य है। उनके लिए राजनीति न कैरियर थी और न ही ख्याति का साधन और न ही ताकत हासिल करने का उपकरण।…
हम भी याद रखें कि ग्रेट हिमालय को संस्कृत भाषा में ‘हिमाद्रि’ यानी आद्र हिमालय क्यों कहते है? हरिद्वार को ‘हरि के द्वार’ और उत्तराखण्ड को देवभूमि क्यों कहा गया? पूरे हिमक्षेत्र को…
यहां पर हम गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी के रिश्ते की पड़ताल करते हैं। टैगोर और गांधी के विचार, व्यवहार और समझ में जमीन-आसमान का अंतर था। दोनों का यह रिश्ता बराबरी…
रेहाना और ग्रेटा से ज्यादा चिंता का विषय मीना हैरिस का बयान है। मीना हैरिस कमला हैरिस की भांजी है। मीना हैरिस की आलोचना अमेरिकी डेमोक्रेट की सोच को दिखा रहा है, अभी…
आज जब भारत समेत पूरी दुनिया में जाति, धर्म और नस्ल जैसी पहचानों पर आधारित दक्षिणपंथी, प्रतिक्रियावादी विचारधाराओं का प्रभाव बढ़ रहा है, तब नाजी जर्मनी के उदय, विकास और अंत का, खासकर…