पेरिस: फ्रांस में बढ़ती महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त बजट की कमी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। शनिवार को हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने करीब 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया। कई प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने प्रेस वार्ता में गिरफ्तारियों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह संख्या अभी और बढ़ सकती है। उन्होंने बताया कि पिछले शनिवार को इसी समय तक 385 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
आयोजकों ने 8 लाख लोगों के शामिल होने का किया दावा
फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांसीसी सरकार ने देशभर में करीब 4.10 लाख लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने का अनुमान जताया, जबकि आयोजकों ने यह संख्या लगभग 8 लाख बताई। राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे।
पेरिस में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद कूर्स डी विन्सेन्स इलाके में प्रदर्शन को पूरी तरह समाप्त करा दिया गया। पुलिस के मुताबिक, मार्च के अंतिम हिस्से में 500 से अधिक उपद्रवी मौजूद थे। स्थिति पर नजर रखने और शेष समूहों का पता लगाने के लिए जेंडरमेरी का हेलीकॉप्टर भी तैनात किया गया।
पुलिस पर वस्तुएं फेंके जाने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
कई बड़े शहरों में फैला विरोध प्रदर्शन
पेरिस के अलावा ल्योन, लिली, मार्सेई, मोंपेलिए, नांत और टूलूज जैसे प्रमुख शहरों में भी प्रदर्शन हुए। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव देखने को मिला।
यूरोन्यूज के अनुसार, ल्योन में करीब 150 प्रदर्शनकारियों ने एक प्रमुख सड़क को अवरुद्ध करने की कोशिश की। इसके बाद दंगा नियंत्रण पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर भीड़ को हटाया। वहीं, फ्रांस 24 के मुताबिक, ल्योन में करीब 10,000 लोगों ने मार्च निकाला।
दक्षिण-पश्चिमी शहर टूलूज में स्थानीय प्रशासन ने लगभग 26,000 लोगों के प्रदर्शन में शामिल होने का अनुमान जताया। इन प्रदर्शनों में वामपंथी दलों के नेता, ट्रेड यूनियन, छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए।
छात्रों के आंदोलन से शुरू हुआ विरोध, अब देशव्यापी मुहिम
फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत एक महीने से अधिक समय पहले छात्रों के आंदोलन से हुई थी। छात्र हाई स्कूलों में सुविधाओं की कमी, शिक्षकों की कमी, स्कूल के समय और सरकारी तथा निजी शिक्षा संस्थानों के बीच असमानता जैसे मुद्दे उठा रहे थे।
धीरे-धीरे यह आंदोलन व्यापक रूप लेता गया और इसमें ट्रेड यूनियनों, नागरिक संगठनों तथा ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन से जुड़े लोगों की भागीदारी बढ़ गई। बढ़ती जीवन-यापन लागत और सार्वजनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलने को लेकर लोगों का गुस्सा भी बढ़ता गया।
पिछले सप्ताह महंगाई के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के बाद प्रशासन इस बार किसी भी तरह की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सतर्क था। हालांकि, शुरुआती प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शनिवार देर शाम पेरिस में स्थिति बिगड़ गई।
जीन-ल्यूक मेलेंशों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
फ्रांस की वामपंथी पार्टी ‘फ्रांस अनबाउंड’ के नेता और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जीन-ल्यूक मेलेंशों ने पेरिस में पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और टेलीविजन कवरेज के जरिए आंदोलन की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
मेलेंशों ने प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण विरोध को पर्याप्त जगह नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए लोगों से मीडिया कवरेज के आधार पर राय बनाने के बजाय स्वयं तथ्यों को समझने की अपील की। उन्होंने पुलिस कार्रवाई के दौरान दो लोगों के घायल होने का भी दावा किया।
हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर मेलेंशों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की आव्रजन नीति की आलोचना की
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्जिया के पेरी में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित चुनावी रैली के दौरान फ्रांस की आव्रजन नीति पर निशाना साधा।
ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस की समस्याओं की एक वजह उसकी खुली सीमा नीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि फ्रांस में आने वाले कुछ लोग वहां की संस्कृति, इमारतों और ऐतिहासिक स्मारकों का सम्मान नहीं करते। ट्रंप ने इसी संदर्भ में अमेरिका की आव्रजन नीति का बचाव भी किया।
फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देश में महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
फिलहाल, फ्रांस के कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। सरकार और प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ बढ़ती महंगाई तथा सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी जनता की नाराजगी से निपटने की चुनौती है।
