अड़ियल रुख छोड़ किसानों से बातचीत करे सरकार: राजन

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हरियाणा Updated On :

गुरुग्राम। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्ष, कुमारी सैलजा के राजनैतिक सचिव व दक्षिण हरियाणा के प्रभारी राजन राव ने संयुक्त किसान मोर्चा  द्वारा 26 मार्च को भारत बंद का समर्थन करते हुए कहा कि जिस दिन किसान आंदोलन शुरू हुआ था उसी दिन कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया था कि कांग्रेस पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता इस आंदोलन को मजबूत करने और केंद्र की सरकार द्वारा थोपे गए तीनों काले कानूनों को खत्म करने के लिए किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस लड़ाई को लड़ेगा।

भारत बंद की इस जिम्मेवारी को पूरे प्रदेश में कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर निभाएंगे। उन्होंने कहा कि लंबे समय से किसान अपना घर – परिवार छोड़कर सड़कों पर बैठे हैं। केवल दिल्ली की सीमाओं पर ही नहीं, देश के विभिन्न हिस्सों में किसान कृषि कानूनों के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। 300 किसान अपने बच्चों के भविष्य को बचाने और दूसरे किसानों को उनका हक दिलाने के लिए अपनी शहादत दे चुके हैं। लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। सरकार को अपना अड़ियल रुख छोड़कर किसानों से तत्काल बातचीत करनी चाहिए।

इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से लेकर किसानों की समस्याओं का समाधान खोजना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहादत देने वाले किसानों को शहीद का दर्जा देकर उन्हें आर्थिक मदद और एक एक आश्रित को सरकारी नौकरी की घोषणा भी तत्काल करनी चाहिए। लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक कांग्रेस लगातार यह मांग कर रही है, लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसान आंदोलन के विस्तार को रोकने के लिए देश भर में ट्रेन संचालन पर रोक लगाए है। इससे सरकार और आम जनता को भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन दिल्ली सीमा पर किसानों की भीड़ को आने से रोकने के लिए रेल नहीं चलाई जा रही।

कहा कि किसी भी किसान संगठन ने इन कृषि कानूनों की मांग नहीं की थी। लेकिन केंद्र की सरकार ने कारपोरेट घरानों को फायदा देने के लिए ये काले कृषि कानून बनाए। कांग्रेस नेता ने कृषि कानूनों की निंदा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार तीनों काले कानूनों को खत्म करके किसानों को फसल की एमएसपी की गारंटी दे और जो भी किसान की फसल को एमएसपी से नीचे खरीदे उस पर आपराधिक मुकद्दमा दर्ज कर सजा का प्रावधान करे, साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि स्वामीनाथन की रिपोर्ट के अनुसार किसान को उसकी फसल का दाम मिले। उन्होंने पूरे देश-प्रदेश के किसानों और राजनीतिक संगठनों  से अपील करते हुए कहा कि सभी राजनीति से ऊपर उठकर आंदोलन कर रहे किसानों के साथ मजबूती से खड़े होकर साथ दें।



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