2018 में मैने अपने शरीर पर जो ढेर सारे प्रयोग किए, उसके पीछे दो किताबों की भी बड़ी भूमिका रही। पहली किताब का नाम है- ऐन्टी फ्रैजाइल। इसका लेखक नसीम निकोलस तालिब कहता…
गांधी के समकालीन और उत्तरवर्ती चिंतकों के चिंतन से अहिंसक सभ्यता की एक रूपरेखा बनती है। लेकिन यह अफसोस की बात है कि रूस-उक्रेन युद्ध को लेकर चलने वाली समस्त बहस में उस…
रूस-उक्रेन युद्ध के खिलाफ पहले दिन से रूस सहित दुनिया के कई बड़े शहरों में बड़े पैमाने पर स्वत:स्फूर्त नागरिक प्रतिरोध हुए हैं। लेकिन युद्ध के इर्द-गिर्द चलने वाले तेज घटनाक्रमों के बीच…
रूस-यूक्रेन युद्ध आठवें महीने में प्रवेश कर अभी तक का भीषणतम रूप ले चुका है। यूक्रेन के चार प्रांतों कोरूस ने अपनी तरफ से जनमत संग्रह करा कर औपचारिक रूप से रूसी…
जून 1974 में इलाहाबाद के टंडन पार्क में ‘सम्पूर्ण क्रांति’ आंदोलन के समर्थन में आयोजित हुई छात्रों की विशाल सभा में बहत्तर-वर्षीय जेपी ने मूसलाधार बरसात के बीच भी अपने उद्बोधन को जारी…
किसी देश की यात्रा को जांचने-परखने का पैमाना उसका स्वधर्म ही हो सकता है। पहले धर्म और स्वधर्म की व्याख्या के बाद लेख की पिछली कड़ी इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि भारत…
इस सिलसिले की आखिरी बात यह कि यह यात्रा सिर्फ कांग्रेसजन की यात्रा नहीं है। भारत जोड़ो यात्रा को ऐसे कई जन-आंदोलनों और संगठनों, जन-बुद्धिजीवियों तथा गणमान्य नागरिकों का समर्थन हासिल है जिनका…
कहने का मतलब यह कि अगले दो वर्षों में हमें विचार और सूचनाओं का परागण करते हुए संसाधन रूपी मधु इकट्ठी करनी है। इसके लिए हमें तिरहुतीपुर से बाहर निकलना होगा। इन दो…
दुनिया भर की प्रगतिशील ताकतों को सभी साम्राज्यवादी हमलों व युद्धों के खिलाफ एकजुट होना पड़ेगा, अपने खुद के संदर्भों में सर्वसत्तावादी ताकतों का प्रतिरोध करना होगा और इक्कीसवीं सदी में समाजवाद की…
महात्मा गांधी का विचार और उनकी ज़रूरत वर्तमान की विभाजनकारी राजनीति के लिए चरखे के बजाय मशीनी खादी से बुनी गई ऐसी नक़ाब हो गई है जिसके पीछे उनकी सहिष्णुता ,अहिंसा और लोकतंत्र…
वर्ष 1998 में सीताराम केसरी की जगह सोनिया गांधी को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था ।तभी से यह पद बिना किसी चुनाव के सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बीच बंटता रहा है।
देशधर्म का कालखंड राज्य सत्ता के युग परिवर्तन से परिभाषित होता है। औपनिवेशिक भारत का युगधर्म अलग था, स्वतन्त्र भारतीय गणतंत्र का युगधर्म अलग है।
नेताजी को हिंसा के दायरे में खींचने की आरएसएस/भाजपा की कवायद के वास्तविक निहितार्थ को समझने की जरूरत है। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में नेताजी एक बड़ा नाम हैं। जनमानस में उनकी गहरी…
आम ज़िन्दगी में असल दिक्कतें तो स्कूल, अस्पताल, थाना, कचहरी, ब्लॉक व तहसीलों से जुड़ी होती हैं। जिस पार्टी का कार्यकर्ता इसमें जिसकी मदद करता है, वह वोटर उस कार्यकर्ता के साथ जुड़…
उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा की राजनीति एक दूसरे के विरोध की रही है। ऐसे में सपा भले गठबंधन की ओर जाए, मायावती गठबंधन के साथ जाने में आनाकानी करती रही हैं।…
धर्म के पालन का अर्थ है स्वधर्म के प्रति प्रेम, परधर्म के प्रति आदर, अधर्म के प्रति उपेक्षा और विधर्म का प्रतिकार। लेकिन क्या किसी देश का स्वधर्म हो सकता है? हम कैसे…
आज के संदर्भ में भारत जोड़ो यात्रा की सफलता का एक ही पैमाना हो सकता है। क्या यह यात्रा देश के भविष्य पर छाए काले बादलों को छांटने में मदद कर सकती है?…
अगर हमें बहुसंख्यकवाद का विरोध करना है, तो हमें द्रविड़ राजनीति के तीन वैचारिक स्तंभों- क्षेत्रवाद, तर्कवाद और सामाजिक न्याय को नए तरीकों से अपनाना होगा।
अनुभव कहते हैं कि पदयात्रायें बीज बिखेरने जैसा असर रखती हैं। बीज, मिट्टी के भीतर उतरेगा या नहीं ? बीज अंकुरित होगा या नहीं ? कब होगा ? ये सब उसके पर्यावरण में मौजूद हवा,…
डॉ. राधाकृष्णन भारतीय समाज को सच्चे अर्थ में स्वतंत्र बनाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने भारतीय चिन्तन धारा का आश्रय लिया। उन्होंने एक ऐसे भारत की कल्पना की, जहाँ सच्ची सभ्यता के मूल्यों का…
पिछले दो साल से मैं मीडिया छोड़ सभी अन्य 8 आयामों में शागिर्द बन कर सीख रहा हूं। मीडिया में मैं अपना दर्जा उस्ताद का मानता हूं। लेकिन अप्रैल में मेरा प्रमोशन हो…
अभी तक कांग्रेस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि भारत जोड़ो यात्रा का ‘भारत’ नया अर्थात निगम-भारत है, या संविधान-सम्मत वास्तविक भारत - जो निगम-भारत के निर्माण में दिन-रात मरता-खपता और उसके हाशियों पर जीवन बसर करता…
देश में राज्यों के गठन के लिए पहले आयोग का 1953 में न्यायमूर्ति अली फजल की अध्यक्षता में किया गया था। इस तीन सदस्यीय आयोग के दो सदस्य थे हृदय नाथ कुंजरू और…
लोकतान्त्रिक व्यवस्था में विपक्ष दो तरह का हो सकता है। एक ऐसा विपक्ष जो बहुमत के आधार पर विपक्ष की एक ऐसी पार्टी पर निर्भर हो जिसके सदन में सत्ता पक्ष से बहुत…
आज जरूरत इस बात की है कि हमारे स्कूल, कालेज और बड़े-बड़े तकनीकी संस्थान अपने विद्यार्थियों में जुगाड़ की प्रवृत्ति जगाएं। जब तक किसी विद्यार्थी में जुगाड़ की प्रवृत्ति नहीं जगेगी तब तक…